Friday, October 25, 2019

धोनी जानते हैं उन्हें कब उतारने हैं ग्लब्स: रवि शास्त्री

के. श्रीनिवास राव, मुंबईटीम इंडिया के मुख्य कोच भारतीय टीम को अगले दो सालों में होने वाले तीन खास मिशन के लिए तैयार करने में जुटे हुए हैं। टीम इंडिया खुद को वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप और लगातार 2 सालों (2020-2021) में होने वाले दो टी20 वर्ल्ड कप हैं। इन दोनों ही चुनौतियों के लिए टीम इंडिया तैयार दिख रही है और वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के लिए जो पॉइंट्स टेबल का पैमाना तय हुआ है उसमें तो भारतीय टीम दूसरी टीमों से बहुत आगे दिख रही है। इन सब तैयारियों और क्रिकेट के दूसरे पहलुओं पर कोच रवि शास्त्री ने हमारे सहयोगी अखबार 'द टाइम्स ऑफ इंडिया' को एक विशेष इंटरव्यू दिया है। शास्त्री ने समेत धोनी के संन्यास की अटकलों समेत खेल के कई पहलुओं पर अपनी बेबाक राय रखी है। पेश हैं इस चर्चा के खास अंश... साउथ अफ्रीको को घरेलू सीरीज में हराने के बाद अब आगे का क्या टारगेट है? अब अगले दो सालों के लिए हमारा फोकस टी20 फॉर्मेट की ओर शिफ्ट हो जाएगा। इस बीच टेस्ट (मैच) भी चलते रहेंगे, खासतौर से तब जब नई (वर्ल्ड टेस्ट) चैंपियनशिप की शुरुआत हो चुकी है। लेकिन हमें बैक-टू-बैक दो वर्ल्ड टी20 टूर्नमेंट्स (2020-2021) भी खेलने हैं। इस फॉर्मेट के लिए हमारे पास खिलाड़ियों की जो टुकड़ी तैयार है। वह शानदार है। हमें इन प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करना है और उन्हें खुद को व्यक्त करने का भरपूर मौका देना है। इस सबके साथ हमारी यह प्राथमिकता होगी कि उनके साथ टीम से अंदर-बाहर करने की प्रक्रिया नहीं अपनाएंगे, जिससे की उनपर दबाव बने। हम युवा प्रतिभावान खिलाड़ियों को भरपूर मौका देना चाहेंगे। एक बार किसी युवा खिलाड़ी को चुना तो फिर उस पर आगे तक भरोसा जताना होगा। नए सिलेक्टर्स करेंगे टीम इंडिया का चयन...अब शायद नैशनल टीम के चयन के लिए नए सिलेक्टर्स होंगे, तो ऐसे में हमारी योजना होगी कि हम उनसे साथ बैठ कर अपने प्लान पर चर्चा करें और उन्हीं अपनी योजनाओं के बारे में बताएं। पिछली बार जब मैंने आपसे (टाइम्स ऑफ इंडिया) बात की थी, तब भी मैंने कहा था कि टी20 टीम का चयन खिलाड़ियों के कद पर आधारित नहीं होना चाहिए। मुझे लगता है कि हमारी वनडे टीम के 4 से 5 खिलाड़ी टी20 फॉर्मेट में अपनी जगह बना पाएंगे। बाकी खिलाड़ी हमें खेल की मांग के हिसाब (हॉर्सेज फॉर कोर्सेज नीति) से चुनने होंगे। धोनी के भविष्य को लेकर खूब अटकलबाजियां लगाई जा रही हैं...आधे से ज्यादा लोग एमएस धोनी पर यही कॉमेंट कर रहे हैं कि अब वह मैदान पर टीम इंडिया की जर्सी में नहीं दिखेंगे। यह देखिए कि उन्होंने देश के लिए क्या उपलब्धियां हासिल की हैं। लोग इतनी जल्दी में क्यों हैं कि वह संन्यास ले लें? शायद उनके पास बात करने के लिए कोई और मुद्दा नहीं है। वह खुद और जो भी उन्हें जानते हैं- सभी को पता है वह जल्दी ही इस खेल से दूर हो जाएंगे। तो फिर इसे जब होना है, तब होने दो न..। धोनी जानते हैं कब उतारने हैं ग्लब्स उनको लेकर खुद से वक्तव्य देना उनके प्रति असम्मान है। भारत के लिए 15 साल खेलने वाले खिलाड़ी को क्या यह नहीं पता होगा कि कब क्या करना सही होगा? जब वह टेस्ट से रिटायर हुए थे तो उन्होंने क्या कहा था? यही कि ऋद्धिमान साहा को 'कीपिंग ग्लब्स' सौंपने का यह सही वक्त था। वह सही थे। जब भी टीम की बात आती है तो वह हमेशा अपने आइडिया और विचार रखने को तैयार रहते हैं। अभी पिछले ही दिनों वह रांची टेस्ट के अंतिम दिन ड्रेसिंग रूम में आए और उन्होंने शाहबाज नदीम से बात की। जो खिलाड़ी अपने घर पर डेब्यू कर रहा है उसके लिए यह क्या शानदार मोटिवेशन होगा? एमएस धोनी ने अपने खेल यह अधिकार पाया है कि वह खुद यह निर्णय लें कि उन्हें कब रिटायर करना है। अब इस बहस का अंत करना चाहिए।


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